दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:29

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-29

महाकाल क्रुद्ध होने पर कामदेव को भस्म करने में एक क्षण भी नहीं लगाते तो वहीं पर तुष्ट होने पर भस्मासुर को ऐसा वर प्रदान कर देते हैं जिस कारण उनको अपनी जान बचाने के लिए भागना भी पड़ा। ऐसे महादेव के…

Talk when its worth to talk

What purpose will it serve if your talk , instead of pacifying someone's mind, is creating ripples of worries? What is use of your thought if no one gets any benefit out of it? Just be watchful whether you go for a talk only…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:28

जब अश्वत्थामा ने अपने अंतर्मन की सलाह मान बाहुबल के स्थान पर स्वविवेक के उपयोग करने का निश्चय किया, उसको महादेव के सुलभ तुष्ट होने की प्रवृत्ति का भान तत्क्षण हीं हो गया। तो क्या अश्वत्थामा अहंकार भाव वशीभूत होकर हीं इस तथ्य के प्रति अबतक…

A Rise or Fall

A boy is just like a mirror, who mirrors the notion of others feeded in him about him.

If you raise him with affection and love,
He Wins the all and Rises above. …

The Ruler

Whatever your will,
Whatever is choice,
You have to bear,
for this a price.
Your heart may vie,
desire for name,
Be winner of all,
aspire for fame.

Big money Big wealth,
big palace big land,
The control in head ,
and power in hand. …

वक्त का मारा हुआ

हुकुमत की जंग में रिश्ते, नाते , सच्चाई, जुबाँ की कीमत कुछ भी नहीं होती । सिर्फ गद्दी हीं महत्त्वपूर्ण है। सिर्फ ताकत हीं काबिले गौर होती है। बादशाहत बहुत बड़ी कीमत की मांग करती है। जो अपने रिश्तों को कुर्बान करना जानता है , वो…

आओ आओ दीप जलाओ

इस दीवाली सबके हृदय में दया , शांति, करुणा और क्षमा का उदय हो, क्रोध और ईर्ष्या का नाश हो और प्रेम का प्रकाश हो।दीपावली के शुभ अवसर पर सबके शुभेक्षा की कामनाओं के साथ प्रस्तुत है ये कविता" आओ आओ दीप जलाओ।

निज तन मन…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:27

शिवजी के समक्ष हताश अश्वत्थामा को उसके चित्त ने जब बल के स्थान पर स्वविवेक के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया, तब अश्वत्थामा में नई ऊर्जा का संचार हुआ और उसने शिव जी समक्ष बल के स्थान पर अपनी बुद्धि के इस्तेमाल का निश्चय…

विपरीत परिस्थितियों में एक पुरुष का किंकर्तव्यविमूढ़ होना एक समान्य बात है । मानव यदि चित्तोन्मुख होकर समाधान की ओर अग्रसर हो तो राह दिखाई पड़ हीं जाती है। जब अश्वत्थामा को इस बात की प्रतीति हुई कि शिव जी अपराजेय है, तब हताश तो वो भी हुए थे। परंतु…

Ajay Amitabh Suman

[IPR Lawyer & Poet] Delhi High Court, India Mobile:9990389539

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