चाहत

अदा भी सनम के ,

क्या खूब है खुदा मेरे।

लेके दिल पूछते है ,

क्या दिल से चाहता हूँ।

जो दिल ही दे दिया है ,

तो दिल की इस बात को।

दिल से जताऊं कैसे ,

कि दिल से चाहता हूँ।

ये दिल जो ले गए हो ,

दिमाग भी ले जाओ।

मेरी जमीं तुम्हारी ,

आकाश भी ले जाओ।

बस एक जनम की,

चाहत नहीं है मुझको ।

लगता है मुझको ऐसे,

सदियों से चाहता हूँ ।

फिदा थे तुमपे पहले ,

फिदा है तुमपे अबतक।

और चाहुँ क्या तुमसे ,

क्या कहना चाहता हूँ।

ा जाए तू मुझमे ,

समा जाऊँ मै तुुुझमें।

बस इतना चाहता हूँ ,

बस इतना चाहता हूँ।

अजय अमिताभ सुमन

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[IPR Lawyer & Poet] Delhi High Court, India Mobile:9990389539

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